उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, राहत सामग्री और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, 30 अगस्त तक प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 1.70 लाख लोग इसकी चपेट में हैं।
सरकार के मुताबिक, अब तक बाढ़ से जनहानि और पशुहानि की कोई सूचना नहीं है। राहत एवं बचाव गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 1,633 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार राहत सामग्री वितरित की जा रही है। रविवार तक 2,024 खाद्यान्न पैकेट और 10,784 लंच पैकेट बांटे गए।
अब तक कुल 55,572 खाद्यान्न पैकेट और 3.02 लाख से अधिक लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए जा चुके हैं। राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में जरूरत के मुताबिक भोजन और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
बाढ़ के दौरान बीमारियों और संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 200 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 5,432 क्लोरीन टैबलेट और 5,441 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।
जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, वहां लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए 525 नाव और मोटरबोट तैनात की गई हैं।
इनके जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने का अभियान जारी है।
प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए प्रदेश में 254 बाढ़ शरणालय तैयार किए हैं। इनमें से 46 शरणालय फिलहाल संचालित हैं और इनमें 1,151 लोग रह रहे हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान भी जारी है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को किसी तरह के खतरे का सामना न करना पड़े।
30 अगस्त तक बाढ़ प्रभावित जिलों में अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और वाराणसी शामिल हैं।
इन जिलों में स्थानीय प्रशासन और राहत टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन की जरूरतों को भी राहत अभियान में शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, प्रभावित 20,556 पशुओं के लिए अब तक 425.89 क्विंटल भूसा वितरित किया जा चुका है।
इसका उद्देश्य बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के सामने पशुओं के चारे की कमी की समस्या को कम करना है।
बाढ़ के कारण विभिन्न जिलों में अब तक 12 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से 11 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान को लगातार जारी रखते हुए प्रभावित लोगों की जरूरतों के अनुसार सहायता पहुंचाई जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को बनाए रखना है।
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