इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सुनने और समझने की क्षमता के साथ-साथ अपनी बात रखने, सवाल पूछने, कल्पना करने और रचनात्मक तरीके से सोचने की आदत विकसित करना है। अभियान के दौरान बच्चों को उनकी उम्र और रुचि के अनुरूप कहानियां सुनाई जाएंगी और कहानी के माध्यम से उन्हें सीखने के अवसर दिए जाएंगे।
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में बालवाटिका हस्तपुस्तिका की दिवस योजना के अनुसार स्वागत और स्वतंत्र खेल गतिविधियों के बाद कहानी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसी दौरान ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि को बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास से जोड़ा जाएगा।
बच्चों के लिए राज्य स्तर पर उपलब्ध बिग बुक अथवा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उपयुक्त कहानी का चयन किया जाएगा। कहानी ऐसी रखने पर जोर होगा, जो बच्चों की आयु और समझ के अनुरूप होने के साथ उन्हें सकारात्मक एवं नैतिक संदेश भी दे।
कहानी सुनाने के बाद बच्चों से उससे जुड़े अलग-अलग तरह के सवाल किए जाएंगे। इनमें ऐसे प्रश्न भी होंगे, जिनका उत्तर कहानी में सीधे मौजूद हो और ऐसे खुले प्रश्न भी होंगे, जिनके जवाब बच्चे अपनी सोच और कल्पना के आधार पर दे सकें। इससे बच्चों को बिना झिझक अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) तक भी विस्तार दिया गया है। यहां स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग-अलग नवाचारी गतिविधियों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यक्रम में आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को भी शामिल किया जा सकता है। डायट स्तर पर कहानी पढ़ने के साथ उसके बाद बच्चों से चर्चा और प्रश्नोत्तर का सत्र आयोजित किया जाएगा।
अभिभावकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की सहभागिता से कहानी वाचन को और अधिक संवादात्मक बनाने का प्रयास होगा। बच्चों को कागज और रंग देकर कहानी से प्रेरित चित्र बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। उनके बनाए चित्रों को प्रदर्शित कर बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की जाएगी।
अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को कहानी सुनाना नहीं, बल्कि उन्हें कहानी के माध्यम से अपनी कल्पना और विचार व्यक्त करने का अवसर देना भी है। गतिविधि के बाद बच्चे कहानी से जुड़े चित्र बना सकेंगे और अपने बनाए चित्र के बारे में साथियों तथा शिक्षकों के सामने अपनी बात रख सकेंगे।
बच्चों द्वारा तैयार की गई रचनात्मक सामग्री को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उनकी प्रतिभा और सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिलता रहे। सभी बालवाटिकाओं में कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रधानाध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और संबंधित शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश **संदीप सिंह** ने कहा कि योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने की प्रक्रिया को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। उनके मुताबिक, ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियों से बालवाटिका के बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश **मोनिका रानी** ने कहा कि कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह गतिविधि बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक होगी।
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