किशाऊ प्रोजेक्ट पर 6 राज्यों के बीच अहम समझौता,टोंस नदी पर बनेगा बड़ा बांध
(India) लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान संबंधित छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के प्रतिनिधि मौजूद रहे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास बहने वाली यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर बनाई जाएगी। इस परियोजना में एक बड़ा बांध और पनबिजली प्रोजेक्ट शामिल है।
परियोजना के पूरा होने से पानी के बेहतर भंडारण और उपलब्धता में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा यमुना के निचले इलाकों में पानी का प्रवाह बढ़ने की संभावना है। इससे दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को पानी की उपलब्धता के लिहाज से लाभ मिलने की उम्मीद है।
अमित शाह ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ दिल्ली को मिलेगा। उन्होंने बताया कि किशाऊ परियोजना की योजना करीब 1940 में बनाई गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
शाह ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित करते हुए कहा कि परियोजना के लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय बोझ का वहन केंद्र सरकार करेगी। शेष 10 प्रतिशत खर्च 1994 के समझौते के अनुसार संबंधित राज्यों द्वारा उठाया जाएगा।
किशाऊ परियोजना से पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ संबंधित राज्यों को करीब 97,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है। परियोजना से लगभग 1,476 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने का भी अनुमान है।
समझौते के तहत टोंस नदी पर करीब 232 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाए जाने की योजना है। परियोजना का उद्देश्य जल भंडारण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन जैसी कई जरूरतों को एक साथ पूरा करना है।



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