पांच शहरों में स्थापित किए जा रहे डॉप्लर रडार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के मुताबिक, प्रदेश में पांच शहरों में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
इन शहरों में आजमगढ़, लखनऊ, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी शामिल हैं। अब तक आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित किए जा चुके हैं। बाकी तीन स्थानों पर स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
प्रत्येक रडार की रेंज लगभग 250 से 500 किलोमीटर तक बताई गई है। इनसे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर तेज बारिश, आंधी-तूफान और अन्य गंभीर मौसमी घटनाओं की निगरानी करने के साथ उनके पूर्वानुमान में सहायता मिलेगी।
आपदा आने से पहले तैयारी पर जोर
डॉप्लर रडार से मिलने वाली मौसम संबंधी जानकारी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगी। खराब मौसम की आशंका होने पर संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, आवश्यक तैयारियां करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए समय मिल सकेगा।
सरकार का जोर केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाने पर ही नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करके नुकसान कम करने पर भी है। मौसम की बेहतर निगरानी से संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों और आम लोगों को मिलेगा फायदा
मौसम संबंधी गंभीर परिस्थितियों की पूर्व सूचना मिलने से आम लोगों के साथ किसानों को भी लाभ मिल सकता है। किसान संभावित खराब मौसम को ध्यान में रखकर कृषि कार्यों की योजना बना सकेंगे। इससे फसलों, पशुओं और कृषि गतिविधियों को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में बेहतर तैयारी संभव होगी।
इसके अलावा, मौसम की जानकारी के आधार पर प्रशासन संवेदनशील इलाकों में जरूरी कदम उठा सकेगा। हालांकि, पूर्व सूचना की सटीकता और उपलब्ध समय मौसम की स्थिति तथा पूर्वानुमान पर निर्भर करेगा।
डॉप्लर रडार परियोजना पर कितना खर्च?
प्रदेश में पांच डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने के लिए सरकार लगभग 19.50 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके अतिरिक्त रडार साइटों पर सिविल कार्यों के लिए 2.95 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
इस तरह परियोजना पर कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान की व्यवस्था को मजबूत बनाकर प्रदेश में मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना है।
Author: Prashant Kumar Singh
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