इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। मूल्यांकन प्रक्रिया दो चरणों में निर्धारित की गई है। पहले चरण में विद्यालयों ने तय प्रश्नावली के आधार पर अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन किया। अब दूसरे चरण में दर्ज जानकारियों का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा, ताकि पोर्टल पर उपलब्ध विवरण और विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।
जिलास्तरीय समितियां करेंगी भौतिक सत्यापन
सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियां गठित की जाएंगी। इनकी अध्यक्षता जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी करेंगे। समितियों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जलापूर्ति, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की भागीदारी का प्रावधान है। निर्धारित मानकों के अनुसार विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जा सकता है।
इस व्यवस्था के तहत विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और स्व-मूल्यांकन में दर्ज जानकारी की जांच की जाएगी। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने तथा विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
विभिन्न विभागों के कार्मिक बनेंगे मूल्यांकनकर्ता
भौतिक सत्यापन के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्रशिक्षुओं, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), शिक्षक संकुल और संबंधित विभागों के पात्र मैदानी कार्मिकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। इसके अलावा पंचायती राज, राजस्व, मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पात्र कार्मिकों और स्वयंसेवकों को भी प्रक्रिया में शामिल करने का प्रावधान है।
मूल्यांकनकर्ताओं को SHVR प्रश्नावली की जानकारी होना जरूरी होगा। उनके पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी आवश्यक सुविधाएं भी होनी चाहिए। कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालयों की जिम्मेदारी देने का प्रावधान है। विद्यालयों की भौगोलिक निकटता और क्लस्टर के आधार पर आवंटन करने पर जोर दिया गया है।
स्वच्छ और हरित विद्यालयी परिवेश पर जोर
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का उद्देश्य स्कूलों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। दूसरे चरण में होने वाला भौतिक सत्यापन इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश मोनिका रानी के अनुसार, इस रेटिंग के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, भौतिक सत्यापन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।
Author: Prashant Kumar Singh
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