पूजा के लिए नियम
- साधक स्नान कर रेशमी वस्त्र धारण करें। भस्म का त्रिपुंड या तिलक लगाकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर जप करना चाहिए। इस जप को परेशानियों का नाश करने वाला माना गया है।
- पूजन में लाल चंदन, दूर्वा, रक्तकनेर, कमल के पुष्प, मोदक एवं पंचमेवा अर्पित किए जाते हैं।
- भक्ति भाव से पूजन, मनोयोगपूर्वक जप एवं श्रद्धा सहित पूजन करने से सभी कामनाएं पूरी होती हैं।
- यह पूजा कई दिनों तक चलती है इसलिए पूजन के दिनों में गणपत्यथर्वशीर्षसूक्त, श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त कनकधारास्तोत्र आदि का पाठ करना फलदायक है।
पूजा के लिए
पूजन विधि
जिस दिन लक्ष्मी-गणेश का पूजन करना है, उस सुबह जल्दी उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की और मुख करके आसन पर बैठ जाएं। यदि आप चाहें तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके भी बैठ सकते हैं। इसके बाद आचमन एवं प्राणायाम कर श्रीलक्ष्मी विनायक मंत्र के अनुष्ठान का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात चौकी या लकड़ी के पटिए पर लाल कपड़ा बिछाएं। भोजपत्र या रजत पत्र पर अष्टगंध एवं चमेली की कलम से यहां दिया गया लक्ष्मीविनायक मंत्र लिखें। इसके बाद पंचोपचार या षोडशोपचार से भगवान लक्ष्मी-गणोशजी का पूजन करना चाहिए। विधिवत ध्यान कर एकाग्रतापूर्वक मंत्र का जप करना चाहिए। इस अनुष्ठान में मंत्र जपसंख्या सवा लाख से चार लाख तक बताई गई है। अत: यह पूजन कई दिनों तक चलता है। इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह पूजन करने से पूर्व किसी विशेषज्ञ पूजारी से परामर्श कर लेना चाहिए।
Author: Shiv Kishor
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