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राधाजी का जन्म दिवस भाद्रमास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और यह तिथि आज यानि मंगलवार 2 सितंबर को है। पुराणों के अनुसार देवी राधा भगवान श्री कृष्ण से 11 महीने बड़ी थी। ब्रह्मवैवर्त पुराण एक ऎसा पुराण है जिसमें राधा जी के अन्म से जुड़ी एक अनोखी कथा का उल्लेख किया गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा जी भगवान श्री कृष्ण के साथ गोलोक में निवास करती हैं। एक बार जब देवी राधा गोलोक में नहीं थीं तब श्री कृष्ण अपनी एक अन्य पत्नी विराजा के साथ विहार कर रहे थे। जैसे ही राधा को इसकी सूचना मिली वो वापस गोलोक लौट आई और विरजा को श्री कृष्ण संग देख उन्हे भला बुरा कहने लगी। राधा को क्रोधित देख विरजा नदी बनकर वहां से चली गई। इसके बाद कृष्ण को भला-बुरा सुनाने पर श्री कृष्ण के सेवक और मित्र श्रीदामा को गुस्सा आ गया और उन्होंने राधा जी का अपमान कर दिया। इससे राधा जी और गुस्से में आ गई और श्रीदामा को राक्षस कुल में जन्म लेने का शाप दे डाला। बस फिर क्या था श्रीदामा ने भी क्रोध में आकर राधा जी को पृथ्वी पर मनुष्य रूप में जन्म लेने का शाप दे दिया। इस शाप के चले श्रीदामा आगे चलकर शंखचूड़ नामक राक्षस बना। श्रीदामा के शाप के अनुसार राधाजी को कीर्ति और वृषभानु जी की पुत्री के रूप में धरती पर जन्म लेना पड़ा। लेकिन उनका जन्म देवी कीर्ति के गर्भ से नहीं हुआ था। ब्रह्मपुराण के अनुसार जब देवी राधा और श्रीदामा ने जब एक दूसरे को शाप दे दिया तब ही भगवान श्री कृष्ण ने राधा जी से कहा कि पृथ्वी पर तुम्हें गोकुल में देवी कीर्ति और वृषभानु की पुत्री के रूप में जन्म लेना होगा। वहां तुम्हारा विवाह रायाण नामक एक वैश्य से होगा और सांसारिक तौर पर तुम रायाण की पत्नी मानी जाओ, हालांकि रायाण मेरा ही अंश होगा। इसके बाद संसार की दृष्टि में कीर्ति गर्भवती हुई लेकिन उनके गर्भ में राधा ने प्रवेश नहीं किया। कीर्ति ने अपने गर्भ में वायु को धारण कर रखा था और योगमाया के सहयोग से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया लेकिन वायु के बाहर आने के साथ ही राधा जी कन्या रूप में प्रकट हो गई। इसी आधार पर माना जाता है कि राधाजी अयोनिजा थी।
Digital Desk: Shiv Kishor
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