दान- शनि भक्ति में दान का महत्व बताया गया है। दान उदार बनाकर घमण्ड को भी दूर रखता है, इसलिए यथाशक्ति शनि से जुड़ी सामग्रियों या किसी भी रूप में दान धर्म का पालन करें। अहं व विकारों से मुक्त इंसान से शनि प्रसन्न होते हैं। परोपकार- परोपकार धर्म का अहम अंग है। दूसरों के लिए दया भाव खास तौर पर गरीब व कमजोर लोगों के लिए शनि देव को प्रसन्न करता है। अन्न, धन या वस्त्र दान या शारीरिक रोग के साथ ही पीड़ा को दूर करने में सहायता शनि की अपार कृपा देने वाली होती है।
क्रोध का त्याग- शनि का स्वभाव क्रूर माना गया है, लेकिन वह बुराइयों को दण्डित करने के लिए है। इसीलिए शनि कृपा पाने व कोप से बचने के लिए क्रोध से दूर रहना ही बेहतर माना गया है।
सहिष्णुता या सहनशीलता- शनि का स्वरूप विकराल है। वहीं, शनि को कसैले या कड़वे पदार्थ जैसे सरसों का तेल आदि भी प्रिय माना गया है। इसके पीछे भी सूत्र यही है कि कटुता चाहे वह वचन या व्यवहार की हो, से दूर रहें व दूसरों के ऐसे ही बोल व बर्ताव को द्वेषता में न बदलें यानी सहनशील बनें।
बुरे काम न करें- चोरी, बेइमानी, जुआंं आदि से दूर रहेंगे तो शनि देव हमेशा प्रसन्न रहेंगे। शनि की साढ़ेसाती में मांसाहार से दूरी बना ली जाए तो बेहतर परिणाम मिलते हैं।
Digital Desk: Shiv Kishor
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।