सर्वप्रथम स्नान कर पूजा के स्थान पर कलश स्थापना करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र (शैलपुत्री का चित्र/ प्रतिमा उपलब्ध न होने पर मां पार्वती का चित्र/ प्रतिमा काम में ली जा सकती है) को स्नान कर, फूलमाला चढ़ाएं। देशी घी का दीपक जलाएं, धूपबत्ती जलाएं और प्रसाद में मीठा रखें। यदि मिठाई ना हो तो मिश्री प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद मां के सहस्त्रनाम का जाप करें। इसके बाद मां के निम्न मंत्र की कम से कम 108 बार जप करें। "वंदे वादिद्रछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्।।" .... शैलपुत्री की पूजा से क्या फल मिलता है, शैलपुत्री अपने भक्त के लिए मां की करूणा, दया और स्नेह का सागर हैं। इनका आशीर्वाद भक्त साधक को सर्वशक्तिमान बना देता है। उस साधक को अन्य किसी सहायता की आवश्यकता नहीं होती है। वह स्वयं ही देवतुल्य होकर दूसरों को वर देने में सक्षम हो जाता है।
Digital Desk: Shiv Kishor
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