दशहरे पर इन सरल मंत्रों से प्राप्त करें हनुमानजी की विशेष कृपा
(India) श्रीराम हनुमान के मुख से संदेश सुन अति प्रसन्न होते हैं और भक्त पर विशेष कृपा दृष्टि बरसाते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन अर्थात् महानवमी तथा दशहरा के अवसर पर हनुमानजी की पूजा अर्चना से विशेष फल मिलता है। निम्न में से कोई भी एक उपाय करके आप हनुमानजी को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं:

कैसे होंगे हनुमानजी प्रसन्न

> रामरक्षास्त्रोत का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ करें।
> पूजा के बाद भोग के रूप में भोजन की थाली चढ़ाएं।
> राम मंदिर में जाकर दीया जलाएं और प्रसाद चढ़ाएं।

क्या भोग लगाएं

मेष- लड्डू और अनार
वृष- रसगुल्ले का भोग
मिथुन- काजू की मिठाई
कर्क- मावे की बर्फी और नारियल का भोग
सिंह- गुड़ व बेल का फल
कन्या- तुलसी के पत्ते और नाशपाति या कोई भी हरा फल
तुला- कलाकंद और सेब
वृश्चिक- गुड़ की रेवड़ी का भोग
धनु- बेसन की चक्की या बेसन की मिठाई
मकर- गुलाब जामुन और काले अंगूर का भोग
कुंभ- चॉकलेटी रंग की बर्फी या चीकू
मीन- जलेबी और केले का भोग

ऎसे टल जाएगा बड़ा संकट

अगर कोई बड़ी समस्या या संकट हो तो राम स्तुति श्री रामचंद्र कृपालु.... को दिन में तीन बार भगवान राम या हनुमानजी के मंदिर में जाकर या उनके चित्र के सामने बैठकर गाने से समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा सात शब्दों का एक मंत्र भी सहायक होता है जो है- श्री राम, जय राम, जय जय राम।

हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए रामचरितमानस के सरल मंत्र

विपत्ति नाश के लिए
श्राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।

कठिन क्लेश नाश के लिए
हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसूH

विघ्न शांति के लिए
सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपा बिलोकहिं जेही

चिंता की समाप्ति के लिए
जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू

अकाल मृत्यु निवारण के लिए
नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।

खोई वस्तु पुन: प्राप्त करने के लिए
गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

जीविका प्राप्ति के लिए
बिस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।

दरिद्रता मिटाने के लिए
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए
जिमि सरिता सागर महुं जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएं। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं।।

ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिए
साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।।

Digital Desk: Shiv Kishor

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