पति-पत्नी को रखना चाहिए संयम
ग्रहण काल में पति-पत्नी को संयम रखना चाहिए यानी दूरी बनाए रखनी चाहिए। यदि ग्रहण के समय पति-पत्नी द्वारा संबंध बनाए जाते हैं तो यह अशुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय बनाए गए संबंध से उत्पन्न होने वाली संतान राक्षस समान पैदा होती है यानी उस संतान में कई दुर्गण हो सकते हैं। अत: पति-पत्नी को ग्रहण काल में सावधानी रखनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद पका हुआ भोजन खाने योग्य नहीं रह जाता है। अत: चंद्र ग्रहण के समय घर में रखे हुए पके भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए। इसके लिए शाम से पहले से तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेना चाहिए। तुलसी के पत्तों से भोजन पर ग्रहण का बुरा असर नहीं होता है।
ग्रहण के बाद साफ-सफाई करें- ग्रहण के बाद घर को ऐसे ही नहीं रहने देना चाहिए। ग्रहण के बाद घर और घर के मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। मंदिर में रखी हुई मूर्तियों को जल से स्नान करवाना चाहिए। ग्रहण काल में पूजन न करें-
चंद्र ग्रहण के समय किसी भी प्रकार का पूजन नहीं करना चाहिए। इसी वजह से ग्रहण काल में सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान सिर्फ मंत्रों का मानसिक जप किया जा सकता है। मानसिक जप यानी बिना आवाज किए धीरे-धीरे मंत्रों का जप करना। मंत्र कोई भी हो सकते हैं, जैसे- ऊँ नम: शिवाय, श्रीराम, सीताराम, ऊँ रामदूताय नम: आदि। आप चाहें तो अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप कर सकते हैं।
गर्भवती स्त्रियों को बाहर नहीं निकलना चाहिए-
चंद्र ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रियों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, अन्यथा गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर हो सकता है। ग्रहण काल के समय वातावरण में कई प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है जो कि गर्भवती स्त्रियों पर बुरा असर डालती है। ग्रहण के कारण वातावरण में हानिकारक तरंगे सक्रिय हो जाती हैं, इनसे बचने के लिए घर में ही रहना श्रेष्ठ है।
Digital Desk: Shiv Kishor
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