विपत्ति नाश के लिए
श्राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।
कठिन क्लेश नाश के लिए
हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।
विघ्न शांति के लिए
सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपा बिलोकहिं जेही।
चिंता की समाप्ति के लिए
जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू।
अकाल मृत्यु निवारण के लिए
नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।
खोई वस्तु पुन: प्राप्त करने के लिए
गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।
जीविका प्राप्ति के लिए
बिस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।
दरिद्रता मिटाने के लिए
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए
जिमि सरिता सागर महुं जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएं। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं।।
ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिए
साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।।
Digital Desk: Shiv Kishor
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