(India)
यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 लाख लोग सफाई के अभाव में रह रहे हैं और 100 करोड़ लोगों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में हर 10 में से नौ लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। 'ग्लास-2014' के नाम से जारी की गई इस रिपोर्ट में यह प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं। यह अध्ययन हर दो साल में डब्ल्यूएचओ द्वारा कराया जाता है। इस अध्ययन के 2014 संस्करण को 'जल और स्वच्छता में निवेश, असमानता को कम करने, उपयोग में वृद्धि' नाम से जारी किया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि पिछले दो दशकों में पीने के साफ पानी तक 23 लाख लोगों की पहुंच बढ़ी है। इसी समय चक्र में डायरिया से मरने वाले बच्चों की मौत का कारण काफी हद तक स्वच्छता से जुड़ा हुआ था। 1990 में यह संख्या 15 लाख थी जो कि 2012 में घटकर छह लाख रह गई। डब्ल्यूएचओ में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग की निदेशक मारिया नेरा इन सुधारों की सराहना की, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी भी यह आंकड़ा काफी बड़ा है। अध्ययन में साफ-सफाई के महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा गया कि 75 फीसदी धनराशि का प्रयोग लोगों को पीने का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए किया जा रहा है।
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