सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे को लेकर विवाद के मद्देनजर मोदी सरकार को परोक्ष संदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा को कायम रखने की जरुरत है और उन्होंने याद किया कि कैसे हवाला घोटाला में अपना नाम आने के तुरंत बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. आडवाणी ने हवाला घोटाला में संलिप्तता के आरोप लगाने के बाद 1996 में संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और इस मामले में क्लीन चिट मिलने के बाद 1998 में वह संसद के लिये फिर से निर्वाचित हुये । आडवाणी ने कहा कि एक नेता के लिए जनता का भरोसा हासिल रखना सबसे बडी जिम्मेदारी है. नैतिकता जो मांग करती है वह राजधर्म है और सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा कायम रखने की जरुरत है.
Digital Desk: Kamal
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