विपक्ष को अपने पीछे एकजुट करने में असफल रहने के बाद कांग्रेस ने अब अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। विवादों में फंसे मंत्री और राजस्थान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग से कांग्रेस जरा भी पीछे नहीं हटेगी। कांग्रेस की रणनीतिक समिति की बैठक में तय हुआ कि यदि पार्टी अकेले दम सरकार के खिलाफ मुखर विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित करने में कामयाब रही तो दूसरे विपक्षी दल उसके साथ खड़े होने को मजबूर होंगे। इसलिए संसद के अंदर से लेकर बाहर सड़कों तक पार्टी जोरदार हंगामा खड़ा करेगी। दबाव की रणनीति संसद से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने तैयार कर ली है। इसके तहत संसद के मानसून सत्र के पहले दिन महिला कांग्रेस की अगुवाई में संसद मार्च होगा। महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा इसका नेतृत्व करेंगी, लेकिन इसको ताकत देने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खड़गे भी पहुंचेंगे।
Digital Desk: Kamal
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