ओडिशा के कंधमाल में वर्ष 2007 में सांप्रदायिक दंगों की वजह धर्मांतरण था और आदिवासी और हिंदू समुदाय के लोग इसके पीछे थे। यह खुलासा इसकी जांच करने के लिए ओडिशा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज बासुदेव पणिग्रही के नेतृत्व में गठित एक सदस्यीय आयोग ने किया है। वहीं आयोग ने कहा कि स्थानीय आदिवासी लंबे समय से धर्मांतरण की गतिविधियों को सहन कर रहे थे। लेकिन इसके साथ ही वह हिंदू समुदाय के साथ मिलकर इन गतिविधियों का कड़ाई से विरोध भी कर रहे थे। 560 पन्नों की रिपोर्ट में जस्टिस पणिग्रही ने कहा कि यही कारण है कि दंगों में आदिवासी और हिंदू समुदाय शामिल हुए। जस्टिस पणिग्रही के मुताबिक दंगों की वजह से कंधमाल के ब्रह्मणिगांव के हिंदू प्रभावित हुए। वहीं, बाराकामा के ईसाई समुदाय के लोगों की संपत्ति जलाई गई थी।उन्होंने कहा, अगस्त 2008 में में कंधमाल जिले स्थित जलासपेटा आश्रम में लक्षमणानंद सरस्वती की जनमाष्टमी के दिन हत्या कर दी गई थी। संयोग से वह भी 2007 के दंगों में घायल हुए थे।
Digital Desk: Kamal
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