मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर गोलीकांड में मारे गए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सबसे पहले फायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की राशि देने की बात कही थी। कुछ ही देर बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए सहायता राशि 10 लाख रुपये और गंभीर घायलों को एक लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की। वहीं, देर रात को उन्होंने मुआवजा राशि बढ़ाकर एक करोड़ कर दी। साथ ही मृतकों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दे चुके हैं। इससे पहले उग्र किसान पिपल्यामंडी में पथराव और आगजनी करते हुए दुकानें बंद कराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यापारी से उनकी झड़प हो गई और दोनों पक्षों में मारपीट हुई। प्रदर्शनकारियों ने दुकानों के बाहर रखे टायरों समेत कुछ और सामान जला दिए तो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसके बाद उग्र किसानों ने दलौदा में एक रेलवे फाटक को क्षतिग्रस्त कर दिया और पटरियां उखाड़ने की कोशिश की। सुवासरा में भी दोनों पक्षों में टकराव की खबरें हैं।
मंदसौर में किसानों पर पुलिस की फायरिंग के बीच प्रशासन ने इलाके में इंटरनेट सेवाओं पर बैन लगा दिया है। मंदसौर, रतलाम और उज्जैन में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है। साथ ही बल्क मैसेज करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। किसानों के प्रदर्शन के चलते प्रदेश में दूध, सब्जी सहित अन्य रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं। इस बीच राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने आंदोलन को और बड़ा रूप देने की चेतावनी दी है। किसान मजदूर संघ ने बुधवार को प्रदेशव्यापी बंद का ऐलान किया है। इसके विरोध में व्यापारियों ने भी अनिश्चितकाल के लिए शहर को बंद कर दिया है।मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने पुलिस फायरिंग से इनकार करते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कोई फायरिंग नहीं हुई और ना ही सरकार ने इंटरनेट पर कोई प्रतिबंध लगाया है। गृह मंत्री ने इलाके में कर्फ्यू लगाने की बात से भी इनकार किया है।प्रदेश के किसानों ने एक से 10 जून तक आंदोलन करने का ऐलान किया था। लेकिन भारतीय किसान संघ और मध्य प्रदेश किसान सेना ने सीएम शिवराज सिंह से मुलाकात के बाद आंदोलन को खत्म करने की घोषणा की थी। लेकिन राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ जैसे दूसरे संगठन अब भी आंदोलनरत हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों के इस कदम की आलोचना भी की थी।
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