कानूनी चक्रव्यूह में फंसा लालू प्रसाद का कुनबा
(Athmalgola, Patna) राजद प्रमुख लालू प्रसाद का कुनबा कानूनी चक्रव्यूह में फंस गया है। राजनीति में सक्रिय लालू परिवार के सभी सदस्य, उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, छोटे पुत्र व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद, बड़े पुत्र व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव व बेटी सांसद मीसा भारती इस चक्रव्यूह में हैं। इस चक्रव्यूह से कौन बाहर आएगा, यह तो भविष्य तय करेगा। लेकिन, फिलहाल इनके ऊपर संकट गहराता नजर आ रहा है।
लालू प्रसाद ने स्वयं कहा कि सीबीआई का केस मेरे ऊपर नया नहीं है। 20 साल से मैं इसका सामना कर रहा हूं। हालांकि इस बार का संकट बड़ा है, क्योंकि लालू प्रसाद के साथ राबड़ी देवी व तेजस्वी के ऊपर भी सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की है। लालू प्रसाद के राजनीतिक उभार की बात करें तो मार्च 1990 में वे जनता दल से पहली बार सीएम बने थे। तब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास व रघुनाथ झा को विधायक दल में पछाड़ते हुए यह कुर्सी हासिल की थी।
अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार कर वे राष्ट्रीय मानचित्र पर उभरे। 1995 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद ने बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत ने लालू प्रसाद को राजनीति में और मजबूती से काबिज किया। पिछड़ों-गरीबों के मसीहा के रूप में पहचान बनी। 1996 में चारा घोटाला के सामने आने के बाद इनकी परेशानी बढ़ी। पार्टी में भी विवाद हुआ और लालू प्रसाद ने 1997 में अलग पार्टी राजद का गठन किया।
चारा घोटाले में जेल जाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने राबड़ी देवी को सीएम बनाया। 2000 विस चुनाव के बाद लालू फिर सरकार बनाने में सफल रहे व राबड़ी देवी पुन: मुख्यमंत्री बनीं। 2004 में लालू प्रसाद छपरा और मधेपुरा दोनों लोकसभा सीटों से चुनाव जीते। केंद्र की यूपीए सरकार में रेलमंत्री बने। लालू फिर 2015 में सरकार में आये, दस सालों तक बिहार की सत्ता से दूर रहे लालू प्रसाद फिर 2015 में सरकार में आये। उनकी पार्टी राजद, जदयू और कांग्रेस का महागठबंधन बना।

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