लेकिन सोमवार को चीन के एक सरकारी अंग्रेजी अखबार ने जो खबर प्रकाशित की है उसमें चीन की घबराहट साफ तौर पर देखी जा रही है। अखबार ने लिखा है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास करने से चीन के साथ बने व्यापारिक संबंध को खतरे में डाल सकता है। इतना ही नहीं यह चीन की सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित हो सकता है।
चीन अखबार ने लिखा है कि चीन जब डोकलाम सड़क बनाना चाहता है तो भारत इसका यह कहकर विरोध करता है कि यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। लेकिन अब चीन को खुद सोचना होगा कि भारत की ओर से आयोजित किए जा रहे बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास से उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है।
चीनी मीडिया ने लिखा है कि तीन देशों की नेवी द्वारा किया जा रहा यह अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है। बंगाल की खाड़ी आयोजित हो रहे 10 दिवसीय इस युद्धाभ्यास को चीनी मीडिया ने अपने देश के लिए बड़े खतरे का संकेत बताया है। चीनी अखबार में यह भी लिखा है कि अमेरिका ने भारत को युद्धक सामग्री ले जाने वाले लड़ाकू विमान देने की स्वीकृति दे दी है। भारत ये लड़ाकू विमान 365 अरब डॉलर में खरीद रहा है। इतना ही नहीं अमेरिका 2 अरब डॉलर में भारत को कई टोही ड्रोन भी देने जा रहा है। अब चीन को अपनी सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत है।
सिक्किम डोकलाम क्षेत्र में भारत के सामने अपनी दाल न गलते देख चीन तरह तरह के पैंतरे अपना रहा है। कभी पीओके में अपनी सेना भेजने की बात कह रहा है तो कभी भारत की बढ़ती क्षमता को अपने लिए खतरा बता रहा है।
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