वेद वेदांग अनुशीलन संस्थान के अधिष्ठता डॉ. पं. दुर्गादत्त शिवदत्त शास्त्री ने बताया कि सूर्याेदय से लेकर प्रात: 11. 05 बजे तक भ्रदा रहेगी। इसके बाद प्रात: 11. 05 से मध्यान्ह 1.52 बजे तक रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त रहेगा। क्योंकि पश्चात 1.53 बजे से चन्द्रग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगी।
वैसे श्रावणी व फाल्गुनी पूर्णिमा पर भद्रा नक्षत्र को टाला जाता है किन्तु इस बार श्रावणी पूर्णिमा पर चन्द्रग्रहण का सूतक भी पड़ रहा है। हिन्दू धर्म शास्त्रों की मान्यतानुसार सूतक में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। वैसे भाई-बहन के प्रेम के बीच कोई भी बाधा आड़े नहीं आती है, फिर भी रखा बंधन पर बहनों द्वारा राखी बांधने के लिए पौने चार घंटे का उत्तम समय है। इसलिए सूतक से पहले ही रक्षाबंधन करें। सूतक में श्रावणी कर्म, दशविध स्नान, उपनयन संस्कार इत्यादि कर्म निषेध रहेंगे।
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