2022 तक पूरा करने का लक्ष्य इस परियोजना पर 1.08 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह परियोजना आंशिक रूप से जापान द्वारा वित्तपोषित है। परियोजना को दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि जैसे संकेत मिल रहे हैं उससे लगता है कि सरकार इसे 2022 में ही पूरा कर लेगी।
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