गृहमंत्री ने कहा कि हमने शरणार्थियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के 1951 के कन्वेंशन पर दस्तखत नहीं किए हैं। इसलिए भारत रोहिंग्या को वापस भेजकर किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हरेक देश को अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करने का हक है। भारत ने बांग्लादेश में रोहिंग्या को मानवीय आधार पर मदद भी दी है।
गृहमंत्री ने कहा कि र७ोहिंग्या को म्यांमार भेजने के मुद्दे पर बेवजह विवाद नहीं होना चाहिए। म्यांमार ने र७ोहिंग्या समुदाय को वापस लेने की इच्छा जाहिर की है। मानवाधिकार के मुद्दे पर सरकार को घेरने वालों पर निशाना साधते हुए गृहमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार मानवाधिकार ही नहीं पशु अधिकार तक की बात करती है।
राजनाथ ने कह कि शरणार्थी का दर्जा हासिल करने के लिए एक प्रक्रिया होती है और इनमें से किसी ने इस तरीके का पालन नहीं किया है। यह भी साफ हो जाना चाहिए कि म्यांमार से भारत में घुस गए रोर्हिंया शरणार्थी नहीं हैं इस सचाई को समझना होगा। गौरतलब है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर र७ोहिंग्या को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
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