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वाराणसी के कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने काशी हिन्दू विश्वविद्यायल (बीएचयू) परिसर में शनिवार की रात हुए भारी बवाल के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को दोषी ठहराया है। कमिश्नर ने सोमवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार को भेजी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत को संवेदनशील तरीके से नहीं संभाला, न ही स्थिति को सही वक्त पर संभाला। इसी वजह से इतना बड़ा बवाल हुआ। सोमवार को कमिश्नर के पास 27 लोगों ने बयान भी दर्ज कराया है। इनमें से ज्यादातर लोगों ने कहा कि बीएचयू में हुआ उपद्रव विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही का नतीजा है। तीनों ने अगर सही समय पर अपनी भूमिका का निर्वहन किया होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि शासन जल्द ही पुलिस और प्रशासन के बड़े अफसरों पर कार्रवाई कर सकता है। उधर, चौतरफा आलोचनाओं के बाद वाइस चांसलर भी बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। घटना के तीसरे दिन महामना की मूर्ति पर कालिख पोतने की तहरीर दी गई। वीसी ये भी दावा कर रहे हैं कि छात्राओं पर लाठीचार्ज नहीं किया गया। कार्रवाई भी उन्हीं छात्रों पर की गई जो बीएचयू की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और पेट्रोल बम फेंक रहे थे। इस बीच प्रशासन ने पिछले दिनों कैंपस में हुई घटनाओं की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज वी.के.द्विेवेदी की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय समिति करेगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों की टीम में महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा।
Digital Desk: Kamal
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