सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाबालिग लड़कियों के विवाह पर लगेगी रोक देश में 27% लड़कियों के होते हैं बाल विवाह...
(DELHI, DELHI) सुप्रीम कोर्ट द्वारा नाबालिग पत्नी से यौन संबंध स्थापित करने को बलात्कार के दायरे में लाए जाने के फैसले का स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से लड़कियों के कम उम्र में होने वाले विवाह की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे एनएचएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार करीब 27 फीसदी लड़कियों की शादी अभी भी 18 साल से पहले हो जाती है। कई राज्यों के ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 46 फीसदी तक दर्ज किया गया है।
पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक डा. पूनम मुर्तजा ने कहा कि इस फैसले के लागू होने से नाबालिग लड़कियों के विवाह घटेंगे। अभी भी कानून है लेकिन कानूनी प्रावधानों से लोग उतना नहीं डरते हैं जितना सुप्रीम कोर्ट के आदेश से। सरकारी एजेंसियां भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के मामले में तत्पर रहती हैं। उन्हें भी इस बात का ध्यान रहता है कि कोई इसका उल्लंघन नहीं करे। इसलिए इस फैसले के बाद बेटे का विवाह करने वाले जरूर पहले यह प्रमाण पत्र देखेंगे कि होने वाली बहू 18 साल पूरे कर चुकी है या नहीं।
मुर्तजा ने कहा कि यदि फिर भी लड़कियों के बाल विवाह होते हैं तो ऐसे मामलों में सरकारी एजेंसियों और गैर सरकारी संगठनों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई करना आसान होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। ऐसे में यह एक व्यापक फैसला है।
एनएफएचएस-4 के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में 31.5 फीसदी लड़कियों के विवाह 18 साल से कम उम्र में होते हैं जबकि शहरों में यह प्रतिशत 17.5 फीसदी है। ये आंकड़े 2015-16 के हैं। जबकि इससे पूर्व जब 2005-06 में यह सर्वे हुआ था जब 47 फीसदी लड़कियों के बाल विवाह हो रहे थे। आदर्श स्थिति यह है कि यह प्रतिशत शून्य के स्तर पर आए। केरल में यह सबसे कम करीब 7 फीसदी दर्ज किया गया है।
पश्चिम बंगाल में स्थिति सर्वाधिक गंभीर-सर्वेक्षण के अनुसार पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में 46.3 फीसदी विवाह कम उम्र में हो रहे हैं। जबकि राजस्थान के गांवों में यह प्रतिशत 40.5, झारखंड में 44.3 बिहार में 40.9 फीसदी तक दर्ज किया गया है।
सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 21 फीसदी लड़कियों के विवाह कम उम्र में हो जाते हैं। जबकि दस साल पूर्व यह प्रतिशत 58 फीसदी दर्ज किया गया था। भारी कमी आई है लेकिन 21 फीसदी का आंकड़ा भी कम नहीं है। गांवों में यह 25 फीसदी और शहरों में 11 फीसदी हैं।
ऊबहार में 39 फीसदी लड़कियों के विवाह कम उम्र में होते हैं। दस साल पहले यह आंकड़ा 60 फीसदी था। गांवों में 41 और शहरों में 27 फीसदी कन्या विवाह अभी भी कम उम्र में हो रहे हैं।

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