बेरहम पिता ने दो मासूम बेटियों को चलती ट्रेन से फेंका...
(Sitapur, Sitapur) बेरहम पिता ने दो मासूम बेटियों को चलती ट्रेन से फेंक दिया। एक ग्रामीण की सूचना पर 108 एम्बुलेंस की सहायता से घायल बच्चियों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। एक बच्ची को होश आ गया है जबकि दूसरी अब भी बेहोश है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह लगभग चार बजे अमृतसर से बिहार के सहरसा जा रही ट्रेन नम्बर 152101 अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन से दो मासूम बच्चियों को उसके पिता ने ही फेंक दिया। सुबह लगभग साढ़े सात बजे जिले के रामकोट थानाक्षेत्र के भवानीपुर गांव के पास टहलने निकले दिनेश मिश्रा ने बच्ची को रेल पटरी के किनारे बेहोशी की हालत में पड़ा देखा। बेहोश बच्ची को पानी के छींटे मारकर होश में लाया गया। होश में आने पर आठ साल की अल्बुन खातून ने कुछ दूर पहले छोटी बहन को भी फेंके जाने की जानकारी दी। दिनेश ने यूपी डायल 100 के साथ 108 एम्बुलेंस को इसकी सूचना दी और अन्य ग्रामीणों को लेकर दूसरी बच्ची की खोज में जुट गए। लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरी बच्ची बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। तब तक एम्बुलेंस भी पहुंच चुकी थी। एम्बुलेंस से घायल बच्चियों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां दोनों का उपचार चल रहा है।
अस्पताल में होश आने पर पिता की बेरहमी का शिकार हुई आठ साल की अल्बुन खातून ने बताया कि बिहार प्रांत के मोतिहारी जिले के गांव छोड़िया निवासी अपने पिता इड्डू व मां अबलीना खातून के साथ ट्रेन से जा रही थी। सुबह के समय उसकी मां अबलीना खातून गहरी नींद में सो गई। इसी दौरान उसके पिता उसकी छह वर्षीय बहन सलीना खातून को गेट के पास लेकर पहुंचे और चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। इसके बाद उसे भी गेट के पास ले गए और फेंक दिया। पुलिस क्षेत्राधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि बच्ची के बयानों के आधार पर बिहार पुलिस से सम्पर्क साधा जा रहा है। दूसरी ओर छह वर्षीय सलीना खातून को अभी तक होश नहीं आया है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्ची के सिर में गहरी चोट है लेकिन हालत खतरे से बाहर है।
जिला अस्पताल में होश में आने पर अल्बुन खातून (8 वर्ष) से पुलिस ने घटना के बारे में पूछा। काफी हिचकिचाते हुए अल्बुन बोली-पापा ने पहले उसकी बहन और फिर उसे चलती ट्रेन से फेंक दिया। पुलिस ने अल्बुन से कहा चिंता मत करो तुम्हारे पापा को अभी पकड़वाते हैं। इतना सुनते ही अल्बुन जोर-जोर से रोने-चिल्लाने लगी-'पकरिहा जिन हमरे अब्बू का पकरिहा जिन। अल्बुन के शब्द सुनकर पुलिसकर्मी व अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोग बेरहम पिता के प्रति बेटी की ममता की चर्चाओं में मशगूल हो गए।

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