15वें वित्त आयोग को मंजूरी, CPSE कर्मियों के लिए बनेगी वेतन नीति, जजों की भी बढ़ेगी सैलरी....
(DELHI, DELHI) सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन में बढो़तरी का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने केंद्रीय लोक उपक्रमों (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज - सीपीएसई) में कार्यरत श्रमिकों की मजदूरी में संशोधन की आठवें दौर की वार्ता के लिए मजदूरी-नीति को भी मंजूरी दे दी। सूत्रों के अनुसार सीपीएसई का प्रबंधन श्रमिकों के साथ मजदूरी पर संशोधन को बातचीत के लिए स्वतंत्र है। इन उपक्रमों में पांच साल या दस साल का मजदूरी समझौता 31 दिसंबर 2016 को समाप्त हो गया है। हालांकि, इस तरह की मजदूरी बढ़ोतरी के लिए किसी तरह का बजटीय सहयोग उपलब्ध नहीं कराएगी। संबंधित सीपीएसई को इसका पूरा बोझ अपने संसाधनों से उठाना पड़ेगा। इसके अलावा सीपीएसई के प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित वेतनमान मौजूदा कार्यकारियो तथा संबंधित कंपनियों के यूनियन के बाहर के कंपनियों से अधिक न होने पाए।
बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है। इसके नियम व शर्तें समय आने पर अधिसूचित होंगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कैबिनेट ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की सैलरी रिवाइज करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षा में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई । विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वेतन में वृद्धि के संदर्भ में संसद में एक विधेयक पेश किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि साल 2016 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने इस बारे में सरकार को पत्र लिखा था और उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अभी वेतन और भत्ते से सभी तरह की कटौती के बाद प्रति माह 1.5 लाख रूपये प्राप्त होते हैं । प्रधान न्यायाधीश को थोड़ा अधिक वेतन प्राप्त होता है।
15वें वित्त आयोग को मंजूरी।
केंद्रीय लोक उपक्रमों में कार्यरत श्रमिकों की मजदूरी में संशोधन की आठवें दौर की वार्ता के लिए मजदूरी-नीति को मंजूरी।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की सैलरी रिवाइज होगी।
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