पीएम मोदी ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि हमारे समाज के कमजोर वर्ग साइबर अपराधियों के बुरे हमलों का शिकार न बनें। साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सतर्कता और जीवन का एक मार्ग बन जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर धमकियों का सामना करने के लिए मुख्य केंद्र बिन्दु सक्षम पेशेवरों का प्रशिक्षण होना चाहिए। साइबर-योद्धा जो सायबर-हमलों के प्रति सतर्क करेंगे। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि युवाओं के लिए साइबर सुरक्षा एक आकर्षक और अर्थ क्षमता वाली जीविका का विकल्प बन जाए। मोदी ने कहा कि राष्ट्रों को डिजिटल स्पेस में यह सुनिश्चत करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि यह क्षेत्र आतंकवाद और कट्टरता जैसी बुराईयों के लिए खेल का मैदान नहीं बन पाए।
उन्होंने कहा कि अचानक बदलते खतरे के परिदृश्य का सामना करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझाकरण और समन्वय आवश्यक है। हम एक तरफ गोपनीयता और खुलेपन के बीच अच्छा संतुलन और दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा चल सकते हैं। एक साथ, हम एक तरफ वैश्विक और खुली व्यवस्था के बीच के अंतरों और दूसरे पर राष्ट्र-विशिष्ट कानूनी आवश्यकताओं को दूर कर सकते हैं। मोदी ने कहा कि इंटरनेट समावेशी है और किसी विशेष के लिए नहीं है। इसकी पहुंच अवसर में समानता और हिस्सेदारी प्रदान करती है। आज के प्रवचन को फेसबुकर्स, ट्विप्लेस और इंस्टामामार्स द्वारा आकार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ने साइबर स्पेस पर ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करने के मौके पर कहा कि जन धन बैंक खातों, आधार और मोबाइल फोन से भ्रष्टाचार कम हुआ है और पारदर्शिता लाने में काफी मदद मिली है। उन्होंने कहा कि तकनीक बाधाओं को तोड़ती है और यह भारतीय परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम को मान्यता प्रदान करती है और दुनिया एक परिवार है।
उन्होंने कहा कि हम अपने नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए मोबाइल पावर या एम-पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी बहुत से काम करने में सक्षम है यह कुशल सेवा वितरण और प्रशासन के लिए रास्ता बनाती है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से लोगों का सशक्तिकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि साइबर स्पेस पर वैश्विक सम्मेलन जीसीसीएस में फ्रांस रूस जापान इस्राइल व इंग्लैंड सहित 33 देशों के आईटी/साइबरस्पेस मंत्री भाग लेंगे। सम्मेलन में 700 विदेशी सहित कुल 2000 प्रतिनिधियों के भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि जीसीसीएस दुनिया में अपनी तरह का प्रमुख आयोजन है जिसका पहली बार भारत में आयोजन होना यही दर्शाता है कि दुनिया इस क्षेत्र में भी भारत की महत्ता को रेखांकित कर रही है।
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों व घटनाक्रम में साइबर डिप्लोमेसी को लेकर भारत की बात सुनी जा रही है और इस आयोजन के जरिए भारत अपनी सोच को पूरी दुनिया में रखेगा। भारत इस सम्मेलन के जरिए दो प्रमुख संदेश देना चाहता है- ‘सुरक्षित साइबर-सुरक्षित दुनिया’ तथा ‘समावेशी साइबर-विकसित दुनिया| भारत चाहता है कि यह आयोजन साइबर स्पेस पर सार्थक भागीदारी व संवाद का प्रमुख मंच बने। उल्लेखनीय है कि साइबरस्पेस से मोटे तौर पर आशय कंप्यूटर नेटवर्कों के जरिए क्नेक्टिवटी से है। नेटवर्किंग की सारी आभासी दुनिया को साइबर स्पेस कहा जाता है और भारत इसे अधिक से अधिक सुरक्षित बनाए जाने पर जोर दे रहा ह दो दिन के सम्मेलन में मुकेश अंबानी व सुनील मित्तल से लेकर तारिक कमाल तक दिग्गज नीति निर्धारक उद्योगपति विशेषज्ञ व नवोन्मेषी भाग लेंगे।
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