जैन ने बताया कि ऐक्सिडेंट होने पर ऑटो या टैक्सीवाले पास में प्राइवेट अस्पताल होते हुए भी मरीज को सरकारी अस्पताल लेकर जाते हैं जिसमें समय लग जाता है। अब इस स्कीम के बाद घायलों को गोल्डन आवर में इलाज मिल सकेगा जिससे बचने की संभावना बढ़ जाएगी। स्कीम लागू करने के लिए ऑटो और टैक्सीवालों को ही इसका ब्रैंड ऐम्बैसडर बनाया जाएगा। सरकार उनके लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाएगी जिससे वे इस स्कीम को समझकर लोगों की मदद कर सकें।
Digital Desk: Kamal
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