इससे पहले सरकार ने कहा कि एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ विधेयक तैयार करने में मुस्लिम संगठनों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है, जिसमें आस्था और धर्म का कोई संबंध नहीं है। सरकार से प्रश्न पूछा गया था कि क्या उसने विधेयक का मसौदा तैयार करने में मुस्लिम संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया है, जिस पर कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने ना में जवाब दिया।
Digital Desk: Kamal
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