चारा घोटाला: लालू कोर्ट रूम में मौजूद, बाहर समर्थक कर रहे नारेबाजी
(DELHI, DELHI) चारा घोटाले में फंसे राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत इस केस के सभी 22 आरोपियों पर सीबीआई की विशेष अदालत कुछ देर बाद अपना फैसला सुनाने जा रही है।
21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया है।
आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप है। लालू प्रसाद पर गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी इस पर रोक नहीं लगाने का आरोप है।
लालू यादव चारा घोटाले में पांच केस का सामना कर रहे हैं जिनमें से चार केस उनके खिलाफ लंबित है।
जिस केस में सुनवाई होने जा रही है वह 1994 से 1996 के बीच देवघर जिला कोषागार से फर्वीवाड़े तरीके से निकाले गए 84.5 लाख रूपये से जुड़ा हुआ है।
इस केस मे कुल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव समेत 34 लोग आरोपी है।
इससे पहले चाइबासा कोषागार से 37.5 करोड़ रूपये फर्जीवाड़े तरीके से निकालने के जुर्म में लालू यादव को पांच साल जेल और 25 लाख रूपये जुर्माने की सज़ा सुनाई जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के दिसंबर में उन्हें जमानत दी थी।
साल 2014 में झारखंड हाईकोर्ट ने इस आधार पर चार अन्य केस के ट्रायल पर रोक लगा दी थी कि जब किसी शख्स को एक केस में दोषी करार दे दिया गया है तो फिर उसे उसी केस में उसी गवाह और साक्ष्य पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए।
हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया। जिसके बाद लालू यादव को उनके खिलाफ लंबित सभी चारा घोटाला केस में ट्रायल फेस करना होगा।
शुक्रवार को लालू यादव ने इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि चारा घोटाला केस का राष्ट्रीय जनता दल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आरजेडी को उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप सफलतापूर्व नेतृत्व करेंगे।

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