(India)
एक पुरानी कहावत है कि राजनीति में न तो कोई स्थाई दुश्मन होता है और न ही दोस्त। कल तक एनडीए में बीजेपी से दोस्ती निभाने वाली टीडीपी ने एनडीए का साथ छोड़ और केंद्र की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर एक बार फिर इस कहावत को सही ठहराया है। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पूरी नहीं करने का आरोप लगाकर टीडीपी ने पहले नैशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) छोड़ने का फैसला किया। इसके तुरंत बाद आंध्र प्रदेश के सीएम और टीडीपी मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी।हालांकि इस अविश्वास प्रस्ताव से मोदी सरकार पर कोई खतरा नहीं है। लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के पास अकेले 274 सांसद हैं। लोकसभा में फुल बेंच की स्थिति में भी बहुमत के लिए 272 सांसदों का आंकड़ा होना चाहिए। ऐसी स्थिति में बीजेपी अकेले दम पर ही बहुमत साबित कर सकती है।
आपको बता दें कि टीडीपी से पहले वाईएसआर कांग्रेस ने भी आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने का आरोप लगाकर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। टीडीपी ने विपक्ष से भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने का आह्ववान किया है। आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर केंद्र से पहले अपने दो मंत्रियों को हटाने वाली टीडीपी के पास लोकसभा में 16 सांसद हैं। वहीं वाईएसआर के 9 सांसद हैं।
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