उन्होंने कहा कि कुरान व हदीस के अनुसार मस्जिदें अल्लाह का घर हैं। उसकी संपत्ति हैं। उसे अधिग्रहीत नहीं किया जा सकता। इसे ढहाने पर भी महत्व समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि फैसला ढांचे को ढहाने के बाद आया, जिससे केस एकपक्षीय हो गया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दो हिस्स हिंदू पक्ष को देने का फैसला किया। मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि इस व्यवस्था ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक व्यवहार और पूजा करने की आजादी) के दायरे को सीमित कर दिया है। अनुच्छेद 25 हर धर्म को उसके पूजा स्थान रखने का अधिकार देता है। लेकिन फैसले में इसे नकार दिया गया।
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