ट्रेनिंग में हवा के साथ-साथ जमीन पर भी बहादुरी दिखाएंगे वायुसेना के जवान
(DELHI, DELHI) वायुसेना के जवानों के युद्ध कौशल में सुधार लाने के लिए उन्हें अत्याधुनिक हथियार चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण थल सेना के जवानों को मिलने वाले प्रशिक्षण की तर्ज पर होगा जिसमें उन्हें विभिन्न किस्म के हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। मकसद यह है कि वायुसेना केंद्रों की स्थापना में विशेष रूप से प्रशिक्षित वायुसैनिकों को तैनात कर सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, पठानकोट वायुसेना बेस पर हुए हमले के बाद सुरक्षा के लिए उठाए गए कई कदमों में एक यह भी है। वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि इसकी शुरुआत कर दी गई है। इसके तहत जो वायुसैनिक 25 साल से कम उम्र के हैं, उन्हें छह सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही हैं जिसमें विभिन्न किस्म की बंदूकें रायफल चलाना सिखाया जाता है। धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जाएगा। वायुसेना में आमतौर पर 17 साल की उम्र में सैनिक भर्ती होते हैं, इसलिए 25 साल तक की उम्र के सैनिकों की संख्या काफी है।
अभी तक वायुसेना में भर्ती होने वाले सैनिकों को युद्ध संबंधी सामान्य प्रशिक्षण ही दिया जाता है। इसलिए वायुसेना जवानों को सुरक्षा में लगाने के लिए उन्हें और प्रशिक्षण देने की जरूरत महसूस की गई है। दरअसल वायुसेना में सैनिक युद्ध की भूमिका में नहीं होते हैं बल्कि जंगी जहाजों से अफसर युद्ध लड़ते हैं।
भविष्य में नए भर्ती होने वाले गैर तकनीकी वायुसैनिकों को थल सेना में भी कुछ समय के लिए नियुक्त कर युद्धक अनुभव लेने का मौका दिया जा सकता है। वायुसेना ने कुछ समय पूर्व ही अपनी गरुड़ सेना को थल सेना में डेपुटेशन पर तैनात करना शुरू किया है। लेकिन गरुड़ सैनिकों की संख्या बहुत कम है। गरुड़ वायुसेना का विशेष फोर्स है जिसे दूसरे देश में घुसकर आपरेशन करने के मकसद से तैयार किया गया था। इसलिए गरुड़ के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।
वायुसेना केंद्रों की सुरक्षा में अभी पूर्व सैनिकों की मदद ली जाती है। डिफेंस सिक्योरिटी कार्प करके अलग से एक बल बनाया गया है। दूसरे कुछ वायुसैनिक भी तैनात होते हैं। लेकिन इस सुरक्षा व्यवस्था को चौक-चौबंद नहीं माना गया है।
वायुसेना की संख्या करीब डेढ़ लाख है। इसमें से अगर अधिकारियों की संख्या घटा दी जाए तो करीब सवा लाख से भी अधिक वायुसैनिक हैं। इनमें 50-51 फीसदी तकनीकी सैनिक होते हैं। लेकिन जो बाकी वायुसैनिक हैं वे सुरक्षा बल की तरह पूर्ण तरीके से प्रशिक्षित नहीं होते।

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