लखनऊ की रहनेवाली नाइश हसन खान ने अपनी याचिका में बहुविवाह और हलाल को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। उसमें कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 की धारा 2 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए, क्योंकि यह बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है।
नाइश हसन खान की याचिका में कहा गया है कि कुरान में बहुविवाह की इजाजत इसलिए दी गई है ताकि उन महिलाओं और बच्चों की स्थिति सुधारी जा सके, जो उस समय लगातार होने वाले युद्ध के बाद बच गए थे और उनका कोई सहारा नहीं था पर इसका मतलब यह नहीं है कि इसकी वजह से आज के मुसलमानों को एक से अधिक महिलाओं से विवाह का लाइसेंस मिल गया है।
Digital Desk: Administrator
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।