सीबीआई ने आरोप-पत्र में आरोप लगाया था कि जांच के दौरान पाया गया कि डागा ने लौह अयस्क के संबंध में ओडिशा सरकार के साथ समझौते और वित्तीय तैयारी को लेकर भी अप्रमाणित दावे किए थे। इसमें आरोप लगाया कि उस वक्त कोयला मंत्रालय किसी आवेदक कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई गलत जानकारी को जांचने के लिए किसी तरह की प्रणाली का पालन नहीं करता था। इसी को दे्खते हुए जीआईएल और डागा ने सरकार के विभिन्न अधिकारियों को गलत जानकारी दी और माजरा कोयला ब्लॉक को उनके लिए सुरक्षित रखने या उन्हें आवंटित करने के लिए तैयार कर लिया।
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