डब्लूएचओ ने वायु गुणवता आंकड़ों पर आधारित अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया भर के 90 फीसदी लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। इसकी वजह से 2016 में 70 लाख (7 मिलियन) लोगों की मौत हुई थी। इसमें ये भी बताया गया है कि 2016 में दुनिया भर में उद्योगों से निकलने वाले धुएं, ट्रक और कार से निकलने वाले धुएं की वजह से जो वायु प्रदूषित होती है उससे करीब 4.2 मिलियन यानी 42 लाख लोगों की मौत हुई थी। वहीं इन्डोर यानी घर के अंदर मौजूद प्रदूषण के कारण के कारण 3.8 मिलियन यानी 38 लाख लोगों की मौत हुई थी।
भारत परिवेश और इनडोर वायु प्रदूषण के दोहरे बोझ के वजन के नीचे भी पीड़ित है। विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के कई छोटे कस्बों और शहरों में दिल्ली के मुकाबले प्रदूषण के स्तर की भी रिपोर्ट है; दिल्ली की आबादी, 17 मिलियन से अधिक लोगों का घर वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभाव को जोड़ती है।
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