इधर,देश में हर 14 दिन में एक नई योजना की लॉन्चिंग के कारण सरकार की एक्टिवनेस भी नजर आई। इसी तरह ट्विटर और 'मन की बात' के जरिए उन्होंने जनता से सीधे जुड़ने की पहल की।
उन्होंने देश को अब तक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म सिस्टम दिया, पुराने दिवालियापन कानून को नया रूप दिया, पुराने रुके हुए प्रॉजेक्ट को फिर से शुरू किया और अपनी परफॉर्मेंस से वर्ल्ड बैंक को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि भारत बिजनस करने के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बेहतर देश है। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था में अभी सब कुछ ठीक नहीं है।
सरकारी और प्रावेट बैंकों में धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। बैंकों का डूबे हुए कर्ज का ढेर अब तक का सबसे बड़ा हो चुका है। निवेशक मजबूत डॉलर के बीच भारतीय शेयरों और बॉन्डों को खत्म कर रहे हैं। शुरुआती तीन साल के बाद अब एफडीआई में भी कोई खास बढ़ोतरी नजर नहीं आ रही है।
मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 में जबरदस्त बढ़त के साथ सरकार बनाई थी। चुनाव के दौरान मोदी ने बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, भ्रष्टाचार खत्म करने, गरीबों का उत्थान करने का वादा किया थ। मोदी के पास इन सब वादों को पूरा करने के लिए महज एक साल बचा है। मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलता बेरोजगारी है।
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