कई देशों ने मालदीव को सिर्फ इसलिए वोट नहीं किया क्योंकि भारत ने इंडोनेशिया को समर्थन देने के संकेत दे दिए थे। हालांकि एक समय मालदीव ने दावा किया था उसे 60 देशों का लिखित में समर्थन हासिल है जबकि 30 से ज्यादा देशों ने मौखिक तौर पर वोट देने की बात कही है।
मालदीव के खिलाफ पहली दंडात्मक कार्रवाई
भारत ने भी पहले मालदीव को समर्थन देने की बात कही थी लेकिन यह कदम मालदीव के खिलाफ पहली दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समय में मालदीव हिंद महासागर में भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ काम कर रहा है। मालदीव के कुछ फैसले भी भारत को नागवार गुजरे। भारत द्वारा गिफ्ट किए गए दो हेलिकॉप्टरों को मालदीव ने जून के आखिर तक वापस लेने को कहा है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि भारतीयों के लिए वर्क परमिट्स को रोक दिया जाए।
भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद लगातार भारत के समर्थन का दावा करते रहे। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा था कि भारत ने मालदीव को लिखित तौर पर समर्थन देने का आश्वासन दिया है। उधर, वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने भारत से समर्थन मांगा था। पिछले हफ्ते भारत ने मालदीव के राजनीतिक हालात पर चुप्पी तोड़ते हुए बिना सुनवाई के राजनीतिक कैदियों को सजा देने के लिए यामीन सरकार पर निशाना साधा था।
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