कहा जा रहा है कि कंपनी के आरोपी प्रमोटर्स ने एक तरह से आपराधिक साजिश रचते हुए सरकार की उड्डयन नीति में बदलाव कराने का प्रयास किया। इसके उन्होंने कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और लॉबिस्टों का सहारा लिया। इसके पीछे कंपनी के प्रमोटर्स का मकसद यह था कि एयर एशिया को इंटरनैशनल ऑपरेशंस के लिए अप्रूवल आसानी से मिल सके।
सीबीआई ने कहा,'यह आरोप भी हैं कि इस मामले में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड और एफडीआई के नियमों का उल्लंघन किया गया। एयर एशिया ने अपनी कंपनी के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी एक विदेशी फर्म को दे दी। यह कंपनी एयरएशिया के साथ जॉइंट वेंचर में होने की बजाय सहायक कंपनी थी।' एजेंसी का कहना है कि वेंकटरमन भी इस पूरी साजिश का हिस्सा थे।
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