चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जस्टिस रोहिनतोन फाली निरमन एम खानविल्कर डीवाई चंद्रचूड़ और इंदू मल्होत्रा की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। दीपक मिश्रा ने महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने का समर्थन करते हुए कहा था कि किस आधार पर मंदिर महिलाओं की एंट्री पर बैन लगा रहा है।
चीफ जस्टिस ने कहा के मंदिर एक सार्वजनिक संपत्ति है जहां कोई भी आ सकता है अगर यहां किसी को भी आने की अनुमति है तो फिर महिलाओं को क्यों नहीं? संविधान में पुरुषों और महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है ऐसे में मंदिर के अंदर महिलाओं को प्रवेश ना करने देना संविधान के खिलाफ है।
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