शीर्ष अदालत ने यह कहा गया है कि इस केस की जांच कर रही केन्द्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने सातों दोषियों को रिहा करने का विरोध किया था। केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को अपने इस फैसले के बारे में 18 अप्रैल को ही सूचित कर दिया गया था।
सातों दोषी पिछले 27 साल से जेल की सजा काट रहे हैं। इससे पहले शीर्ष अदालत ने केन्द्र से कहा था कि वह तमिलनाडु सरकार की तरफ से दोषियों की रिहाई की अपील पर अपना फैसला बताए। सर्वोच्च अदालत की संवैधानिक पीठ के जजों ने 2015 में कहा था कि दोषियों को बिना केन्द्र सरकार की सहमति के रिहा नहीं किया जा सकता है।
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