बहरहाल कोर्ट ने उन लोगों को चुनाव याचिकाएं दायर कर चुनाव को चुनौती देने की अनुमति दी जिन्हें नामांकन पत्र दायर करने से रोक दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि नामांकन दाखिल नहीं करने देने के आरोप से संबंधित चुनाव याचिका 30 दिनों के अंदर दाखिल की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 20,159 सीटों के नतीजे घोषित करने पर लगी रोक हटा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनावों के नतीजे घोषित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में यह भी अंकित किया है कि ईमेल या व्हाट्सएप्प से नामांकन नहीं किया जा सकता। ये कानून में नहीं है। याद दिला दें कि पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने संकेत दिया था कि अदालत जांच करेगी कि क्या बिना विरोध चुनाव होना चुनाव की निष्पक्षता को नष्ट करता है या नहीं।
भाजपा की दोबारा पंचायत चुनाव की मांग पर ममता सरकार ने विरोध करते हुए कहा था कि भाजपा की राज्य में कोई उपस्थिति नहीं है। चुनाव में हिंसा दोबारा मतदान के लिए आधार नहीं हो सकता। अगर ऐसा हुआ तो हर उम्मीदवार जो जीत नहीं सकता वह हिंसा करा सकता है और चुनाव रुकवा सकता है।
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