भाजपा के सहयोगी रहे नायडू ने केंद्र द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने से इनकार किए जाने के बाद इस साल की शुरुआत में एनडीए छोड़ दिया था। उन्होंने संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की खातिर ‘महत्वपूर्ण’ भूमिका निभाने की पेशकश भी की। 68 वर्षीय नायडू ने एक साक्षात्कार में कहा ‘एक विकल्प (मोर्चा) स्वाभाविक रूप से उभरेगा। लोग मोदी सरकार से नाराज हैं और वे एक विकल्प चुनेंगे।’
नायडू के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी मोर्चे द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का चयन नहीं किए जाने से उनकी संभावनाएं प्रभावित नहीं होंगी। उन्होंने कहा अगर चुनाव के पहले विपक्षी मोर्चे की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय नहीं होता है तो मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती।
नायडू ने कहा एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में मैं काम करूंगा (विकल्प के लिए)। निश्चित रूप से मैं जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाऊंगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन बनाने के लिए विभिन्न पार्टियों के साथ बातचीत अब भी चल रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ में हैं, नायडू ने कहा मैं कभी भी केंद्र नहीं जाऊंगा। मैं केंद्र में किसी भी पद या किसी भी भूमिका का इच्छुक नहीं रहा हूं।
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