उपजिलाधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि 61 शवों को बरामद किया गया है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन इन सबके बीच सवाल ये उठ रहा है कि आखिर कहां और किससे चूक हुई है। क्या इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है, या रेलवे या वो लोग जो रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। पढ़ें हादसे में हुई ये पांच बड़ी चूक :
ट्रैक पर पहुंचे लोगों को वहां से हटाने के इंतजाम नहीं थे।
रेल ट्रैक के किनारे मेला लगने की जानकारी रेलवे को नहीं दी थी।
स्थानीय पार्षद ने बिना इजाजत इस मेले का आयोजन किया।
घटना के बाद पुलिस को मौके पर पहुंचने में काफी देर लगी।
मेले में लगी एलईडी स्क्रीन को रेल ट्रैक की ओर लगाया गया था।
घायलों को गुरुनानक अस्पताल और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों की तादात इतनी ज्यादा है कि देर रात अस्पताल में खून की कमी हो गई। हालांकि आईटीबीपी के जवान उनकी मदद को आगे आए।
मृतकों के परिजनों को पंजाब सरकार ने पांच लाख और केंद्र ने दो लाख देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह आज सुबह मौके पर जाएंगे। उधर, रेलमंत्री पीयूष गोयल अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़कर भारत लौट रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्रेन हादसे के बाद शुक्रवार को पंजाब को हर संभव मदद देने की घोषणा की। सिंह ने ट्वीट किया, पंजाब में दशहरा त्योहार के दौरान रेल हादसे में लोगों की मौत पर दुखी हूं। इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं और मैं घायलों के लिए प्रार्थना करता हूं।
गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने पंजाब के गृह सचिव और डीजीपी से इस दुर्घटना के संबंध में बात की है और वे मौके पर पहुंच रहे हैं। केंद्र संकट की इस घड़ी में राज्य की हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। ट्रेन जालंधर से अमृतसर आ रही थी। जोड़ा फाटक पर यह हादसा हुआ।
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