सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मामला एक्सपर्ट का है कोर्ट को इसे डील नहीं करना चाहिए
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, कीमत का खुलासा करने से दुश्मन को विमान की खासियतें पता लग सकती है, इसलिए कीमत का खुलासा नहीं किया गया।
कोर्ट ने कहा, वायुसेना का अधिकारी कोर्ट में होना चाहिए और हम उनकी रिक्वायरमेंट के बारे में विचार कर रहे हैं। रक्षा सचिव मौजूद होने पर कोर्ट ने कहा कि हमें मंत्रालय का अधिकारी नहीं चाहिए, अधिकारी को बुलाया गया है।
शौरी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हमें इस मामले में विमानों कि कीमत से आगे जाना चाहिए क्योंकि यह देश की सुरक्षा के साथ समझौता है क्योंकि एयरक्राफ्ट की संख्या घटा दी गई है।
अरुण शौरी ने सु्प्रीम कोर्ट में कहा, पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को राफेल डील के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा था कि यह पीएम मोदी का फैसला है मैं इसका समर्थन करता हूं, किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
राफेल मामले पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने वकील भूषण से कहा : हम आपको पूरी सुनवाई का मौका दे रहे हैं। इसका सावधानीपूर्वक इस्तेमाल कीजिये, केवल जरूरी चीजें ही कहिए ।
भूषण के बाद अब अरुण शौरी सुप्रीम कोर्ट में रखी दलील, कहा- डसॉल्ट कम्पनी आर्थिक रूप से कमजोर है
भूषण ने कहा, रिलायंस को भारत सरकार के इशारे पर अ़फसेट पार्टनर चुना गया, ये बात फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति हॉलैंड ने भी कहा है
भूषण ने कहा कहा कि प्राइस के खुलासे पर गोपनीयता से समझौता नहीं होता, सरकार ये प्राइस दो बार संसद में बता चुकी है
प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने ऑफसेट प्रावधान को 5 अगस्त 2015 को बदल दिया और डसॉल्ट को अफसेट पार्टनर चुनने का अधिकार दे दिया और बाद में यह कहने लगी कि हमें नहीं पता कि ऑफसेट पार्टनर कैसे चयनित हुआ, पुराने प्रावधान में यह पार्टनर सरकार की मर्जी से चुना जाता था।
प्रशांत भूषण ने कहा, कानून मंत्रालय ने सप्लाई की गारंटी न होने पर आपत्ति की थी। सरकार ने टेंडर निकालने के बजाय अंतर सरकार अग्रीमेंट (IGA) क्यों किया।
याचिकाकर्ता आप नेता संजय सिंह के वकील ने कहा, सरकार ने पुरानी डील रद्द क्यों की
पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी की तरफ से कोर्ट में पेश हुए प्रशांत भूषण ने कहा, राफेल डील के फाइनल होने के सात दिन बाद अंबानी को ऑफसेट पार्टनर के रूप में ले लिया गया और हाल को बाहर कर मेक इन इंडिया को धता बता दी गई, ये किस आधार पर किया गया।
याचिकाकर्ता शर्मा ने कहा कि अटॉनी जनरल को उनकी याचिका का पूरा जवाब देना चाहिए जबकि उन्होंने पूरे दस्तावेज मुहैया नहीं कराए हैं
याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने कहा, मुझे दिए गए दस्तावेज के मुताबिक मई 2015 में बातचीत शुरू हुई थी, जबकि पीएम ने अप्रैल में घोषित कर दिया था कि सौदा हो गया है।
याचिकाकर्ताओं एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार ने फ्रांस से 36 विमानों की खरीद में 'सीरियस फ्रॉड' किया है।
इस मामले में आप नेता संजय सिंह की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट को कहा कि 36 राफेल विमान सौदे की कीमत दो बार सामने आई जबकि सरकार ने दलील दी है कि कीमत को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।
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