बता दें कि पिछले महीने सरकार और आरबीआई के बीच कई मांगों को लेकर खींचतान चली। इनमें वित्तीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए केन्द्रीय बैंक रिजर्व राशि के बड़े हिस्से को सरकार को हस्तांतरित करना और बाजार में और तरलता लाना शामिल है। सरकार और आरबीआई के बीच विवाद 26 अक्टूबर को केन्द्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के मुंबई में एडी श्रॉफ मेमोरियल व्याख्यान में खुलकर सामने आ गया। आचार्य ने अपने भाषण में कहा, 'जो सरकार केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता का सम्मान नहीं करती उसे देर-सबेर वित्तीय बाजार के आक्रोश का सामना करना पड़ता है और बड़ी आर्थिक दुश्वारियां पेश आती हैं।' आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को सरकार द्वारा सावधानीपूर्वक विश्लेषण किए बिना केन्द्रीय बैंक के आपात रिजर्व को लेने के प्रति आगाह किया था। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निदेशक मंडल ने 9.69 करोड़ रुपये की अधिशेष पूंजी से संबंधित मुद्दे की जांच परख के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का फैसला किया। साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में फंसी परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए भी एक योजना पर विचार करने की भी सलाह दी है।
Digital Desk: Administrator
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।