जनवरी 2014 में इसी रामलीला मैदान में बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार मोदी ने वैश्विक मानचित्र पर भारत को सबल रूप से खड़ा करने के लिए अपनी सोच रखी थी। चुनाव से पहले की वह आखिरी राष्ट्रीय परिषद की बैठक थी। उसमें उन्होंने खासतौर से तकनीक, पर्यटन, परंपरा, व्यापार और टैलेंट की बात की थी। इस बार वह सरकार की उपलब्धियों के बारे में तो बताएंगे ही। निचले स्तर पर हुए बदलाव, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा को लेकर उठाए गए कदम के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ी छवि का भी उल्लेख होगा।शाह जहां शुक्रवार को परिषद में उदघाटन भाषण करेंगे वहीं मोदी शनिवार को समापन भाषण देंगे। बताया जाता है कि तीन प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे जिसमें राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा प्रस्ताव अहम होगा।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह बारी-बारी से विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का करारा जवाब भी देंगे। वहीं ओबीसी आयोग, तीन तलाक, आरक्षण जैसे मुद्दे पर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाया जाएगा। महागठबंधन में चल रही खींचतान पर तंज भी होगा। इस बैठक में दस हजार से ज्यादा पदाधिकारी और कार्यकर्ता के आने की उम्मीद है।
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