मायावती और अखिलेश की पार्टी के बीच हो रही दोस्ती के केंद्र में मुस्लिम वोट बैंक है। लोकसभा चुनाव के दौरान इस वोट बैंक में दोनों ही दल बिखराव नहीं चाहते। जिसे वह अपनी जीत की कुंजी मान रहे हैं। सपा और बसपा में 26 साल के लंबे समय बाद दोस्ती होने जा रही है। दोनों ही दलों की मुख्य ताकत मुस्लिम वोट बैंक को माना जाता है। मुस्लिम वोट बैंक जब भी जिस तरफ गया, दोनों में से उसी दल ने जीत हासिल की है। दोनों ही दलों द्वारा मुस्लिमों को साधने के लिए तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं। उनका प्रयास है कि लोकसभा चुनाव में यह मुस्लिम वोट बैंक एकजुट रहे, जिसमें कोई बिखराव ना हो और उसके साथ ही उन्हें दलित, पिछड़ों और अति पिछड़ों का भी साथ मिले, जिससे वह भाजपा को हरा सकें।
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