अभी रेपो रेट 6.50 फीसदी है जिसे आरबीआई ने घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट पर ही आरबीआई बैंकों को एक दिन के लिए उधार देता है। इस रेट के घटने से बैंकों का कर्ज सस्ता हो जाता है। केंद्रीय बैंक ने पिछली तीन मौद्रिक समिति बैठक में पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे पहले इस वित्त वर्ष में दो बार 0.25-0.25 फीसदी की वृद्धि की गई थी। दिसंबर की बैठक के बाद आरबीआई ने कहा था कि अगर महंगाई में तेजी का जोखिम नहीं बढ़ता है तो इसमें कटौती की जाएगी।
जरूरी वस्तुओं और तेल के दाम में थोड़ी कमी आने से खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2018 में 2.19 फीसदी पर आ गई, जो 18 महीने का न्यूनतम स्तर है। थोक महंगाई दर दिसंबर में 3.80 फीसदी रही जो आठ महीने के निचले स्तर पर है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा हुई है। उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफा देने के बाद दास ने दिसंबर 2018 में पदभार संभाला था।
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