विदेश सचिव विजय गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इन आतंकी शिविरों को जैश सरगना मसूद अजहर का साला यूसूफ अजहर उर्फ उस्ताद गौरी चला रहा था। उन्होंने बताया कि आतंकी फिर से हमले की फिराक में थे, इसलिए भारत ने ऐहतियातन गैर सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि आतंकियों के ठिकाने घने जंगल में पहाड़ियों पर थे, जो नागरिक इलाकों से दूर थे।
सूत्रों के मुताबिक भारत का हमला इतना सटीक और तेज था कि पाक सेना जब तक कुछ समझ पाती, तब तक भारतीय जांबाज पायलट अपने पराक्रम का परिचय देकर वापस लौट चुके थे। महज 21 मिनट के ऑपरेशन में वायुसेना ने यह कारनामा कर दिखाया।
सूत्रों की मानें तो भारत ने बालाकोट से पहले पाक अधिकृत कश्मीर के चकोटी और मुजफ्फराबाद में भी बम गिराए। हालांकि केंद्र की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। जानकारी यह भी मिली है कि हमारे पायलटों ने मिराज-2000 विमानों से आतंकी ठिकानों पर महज दो मिनट के भीतर ही 450 किलो से ज्यादा बम बरसा दिए। मिराज के साथ सुखोई-30 और एक ईंधन भरने वाला विमान भी था।
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